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अहोई अष्टमी की कहानी | Story of Ahoi Asthami story in hindi, English

अहोई अष्टमी की कहानी In Hindi

संतान सुख और उनकी लंबी आयु की कामना के लिए  कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस साल आज यह व्रत रखा जा रहा है।  इस व्रत की खास बात यह है कि जिस दिन की अहोई अष्टमी होती है, अगले सप्ताह उसी दिन की दिवाली मनाई जाती है। इस व्रत में महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। पूरे दिन बिना अन्न-जल ग्रहण किए दिन में अहोई माता की कथा कर रात को तारों को देखकर व्रत खोला जाता है। इस व्रत के दौरान किसी भी प्रकार की नुकीली चीज जैसे चाकू आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह व्रत सभी जीवों की रक्षा करना सिखाता है। इस अष्टमी पर रवि योग, गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, साध्य योग मिलकर इस पर्व का महत्व और भी बढ़ा रहे हैं। 

अहोई पूजा का समय-
दिन में अहोई अष्टमी कथा सुनने और पूजन के लिए दोपहर 12:30 से 2 बजे के बीच स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया मुहूर्त का समय श्रेष्ठ होगा। संध्याकाल में अहोई माता के पूजन के लिए शाम 6:30 से 8:30 के बीच स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त होगा।

यहां पढ़ें अहोई अष्टमी व्रत की कथा:

साहूकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने साथ बेटों से साथ रहती थी. मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटीकी खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया. इस पर क्रोधित होकर स्याहु ने कहा कि मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी।

स्याहु के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें. सबसे छोटीभाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है. इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं, वे सात दिन बाद मर जाते हैं सात पुत्रोंकी इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा. पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।

सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और छोटी बहु से पूछती है कि तू किस लिए मेरी इतनी सेवा कर रही है और वह उससे क्या चाहती है? जो कुछ तेरीइच्छा हो वह मुझ से मांग ले. साहूकार की बहु ने कहा कि स्याहु माता ने मेरी कोख बांध दी है जिससे मेरे बच्चे नहीं बचते हैं. यदि आप मेरी कोख खुलवा देतो मैं आपका उपकार मानूंगी. गाय माता ने उसकी बात मान ली और उसे साथ लेकर सात समुद्र पार स्याहु माता के पास ले चली।

रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं. अचानक साहूकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनीके बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है. इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहूने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है।

छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है. गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है।

वहां छोटी बहू स्याहु की भी सेवा करती है. स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है. स्याहु छोटीबहू को सात पुत्र और सात पुत्रवधुओं का आर्शीवाद देती है। और कहती है कि घर जाने पर तू अहोई माता का उद्यापन करना। सात सात अहोई बनाकर सातकड़ाही देना। उसने घर लौट कर देखा तो उसके सात बेटे और सात बहुएं बेटी हुई मिली। वह ख़ुशी के मारे भाव-भिवोर हो गई। उसने सात अहोई बनाकर सातकड़ाही देकर उद्यापन किया।

अहोई का अर्थ एक यह भी होता है ‘अनहोनी को होनी बनाना.’ जैसे साहूकार की छोटी बहू ने कर दिखाया था। जिस तरह अहोई माता ने उस साहूकारकी बहु की कोख को खोल दिया, उसी प्रकार इस व्रत को करने वाली सभी नारियों की अभिलाषा पूर्ण करें।

Story of Ahoi astami

This festival is specifically meant for mothers who have sons. Mother’s keep fast on this day and this is celebrated in the month of October – November (Karthik Mas). Pure water is offered to stars during the evening time by the mothers and they pray for the long life of their sons.

Story-

Once upon a time, there lived a woman in a village. She had seven sons. One day she went to the forest to bring soil for the renovation and painting of her home (this was in the month of kartik just before the Hindu festival Deepawali . She started digging soil with axe nearby a den. Suddenly the woman’s axe fell on the cub in the den and the cub died. The woman felt very sorry and sympathetic. She took soil from the forest and came back.

Few days later, all her seven sons died within a year. She was very sad. One day she narrated her woes to old ladies in her village, she was crying and told them that she didn’t commit the sin and it happened unintentionally. She narrated to the ladies that once when she was digging for the soil in the forest her axe fell on the cub and thereafter within a year all my seven sons died. The ladies appreciated for confessing her guilt and then these ladies told that by confessing the sin she has atoned her half of the sin.

They suggested the woman to pray the goddess Ashtami Bhagwati by sketching the face of the cub. By the grace of god, your sin will cast off. The woman kept fast on the Kartik Krishna Ashtami and then onwards she started praying and keeping fast regularly. By the power of her prayer God’s grace showered and she could get back her all seven sons. Since then, it became a ritual to worship the goddess Ahoi Ashtami Bhagwati religiously every year.

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